16 October 2020

"हॅप्पी हॅप्पी" का संकट..

 कल से नवरात्र प्रारम्भ हो रहे हैं.. आगे दशहरा-दिवाली से होली तक लगातार अनेक त्यौहार आयेंगे और ऐसे प्रत्येक पर्व-उत्सव के दिन समाज-माध्यमों में "हॅप्पी अमका दिन" "हॅप्पी तमका दिन"के सन्देशों की बाढ़ आ जायेगी। इसमें इन पर्व-उत्सवों के परम्परागत महत्त्व तथा पावनता का पूरा अनादर ही होता दिखायी देता है..!

ईसाईयों को देखिये, वे ख्रिसमस की शुभकामनाएँ देने के लिये कभी भी "हॅप्पी क्रिसमस" नहीं कहते, वे हमेशा उनकी परम्परा के अनुसार "मेरी क्रिसमस" ही कहते हैं... कोई भी मुसलमान कभी भी "हॅप्पी ईद" नहीं कहता, हमेशा "ईद मुबारक" ही कहता है... परन्तु हिन्दु ही पाश्चात्यों के आधुनिक प्रभाव में उनके अलग अलग दिन मनाते समय "हॅप्पी फलाँ दिन" "हॅप्पी ढिकला दिन" की तरह भारतीय परम्परा के पर्व-त्यौहारों पर उसी "हॅप्पी हॅप्पी" का खोटा सिक्का फेंक मारते हैं..!

कोई कहेगा कि हम तो उस दिन की शुभकामनाएँ देते हैं... परन्तु वस्तुत: हमारे अधिकांश पर्व किसी न किसी देवता की व्यक्तिगत उपासना से सम्बन्धित होते हैं, उस दिन प्रत्येक व्यक्ति केवल अपने घर में या मन्दिर जाकर उस देवता की उपासना करें यही अपेक्षित है, उस दिन अन्य किसी को शुभकामनाएँ देने का प्रश्न ही नहीं उठता..! "हॅप्पी नवरात्र", "हॅप्पी रामनवमी" या "हॅप्पी शिवरात्री" से क्या मतलब.... उन पर्वों पर तो उन देवताओं का पूजन, जप, उपासना करना ही उचित और अपेक्षित है..! वर्षारम्भ/वर्षप्रतिपदा, दशहरा, दिवाली जैसे उत्सवों के अवसर पर अपने से बड़ों को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद लेने की परम्परा है। ऐसे उत्सवों के दिन अपनी बराबरी के छोटे परिचितों को "यह उत्सव आपके लिये शुभ हो या लाभप्रद हो" इस प्रकार या थोड़े में "शुभ दशहरा", "शुभ दीपावली" ऐसे शब्दों में अपनी शुभेच्छा व्यक्त की जाती रही है... परन्तु अब यहाँ नासमझ "पढ़ेलिखे" लोग "शुभ दशहरा" शुभ दीपावली" या "मंगलमय होली" जैसे शब्द भूल कर वही पाश्चात्यों की जूठनभरी "हॅप्पी दिवाली" "हॅप्पी होली" की पत्तल परोसने लगे हैं..!

अरे, कभी तो सुधर जाइये और अपने पर्व-त्यौहार अपनी परम्परा के अनुसार ही मना कर एक दूसरे के साथ बर्ताव कीजिये..! परन्तु यह "हॅप्पी हॅप्पी" का बुखार इतना सिर चढ़ कर बोलता है कि "गुरुपूर्णिमा" जैसे पावन पर्व पर लोग अपने गुरुजनों और गुरुतुल्य व्यक्तियों को प्रमाण करने की जगह उनके मुँह पर भी "हॅप्पी गुरुपूर्णिमा" का खोटा सिक्का फेंक कर मारते दिखायी देते हैं कि इन पर केवल तरस आता है..!

आशा है कि तथाकथित पढ़ेलिखे लोग समाजमाध्यमों में एक-दूसरों के लिये किसी भी भारतीय पर्व-त्यौहार पर शुभकामनाएँ व्यक्त करते समय इस "हॅप्पी हॅप्पी" की नासमझी को त्याग कर अपनी परंपरा के अनुसार कम से कम "शुभ दशहरा" "शुभ दीपावली" या "मंगलमय होली" ऐसे सन्देश भेज कर अपनी परम्परा का भान रखेंगे...!


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