आजकल अपनी बुद्धि गिरवी रखे हुए कई लोग बिना सोचे-समझे और बिना कुछ जाने एक ही हल्ला मचा रहे हैं कि प्रधानमन्त्री मोदी देश के रेल्वे स्टेशन, सड़के, हवाईअड्डे, बन्दरगाह, सरकारी गोदाम, स्टेडियम सब कुछ "बेच रहे हैं"...! खैर, जब इन लोगों की बुद्धि गिरवी पड़ी है, तब वे समझेंगे कैसे और जानेंगे भी क्या..?
परन्तु सामान्य व्यक्ति के लिये यह समझना आवश्यक है कि मोदी सरकार की National Monetization Pipeline (एनएमपी) योजना वास्तविक रूप से क्या है..?
★ अगले चार वर्षों में कम से कम ₹ ६ लाख करोड़ प्राप्त करानेवाली इस महत्त्वाकांक्षी राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (NMP) की घोषणा वित्तमन्त्री निर्मला सीतारमण ने की है।
★ निजी क्षेत्र की कम्पनियों से अग्रिम धनराशि लेकर उन प्रकल्पों का स्वामित्व सरकार के ही पास रख कर (पुन: बताऊँ कि उन प्रकल्पों का स्वामित्व सरकार के ही पास रख कर) उनसे जनसामान्य से पाने योग्य सेवाशुल्क, कर और लागत का अंश वसूल करने के अधिकार इन निजी कम्पनियों को हस्तान्तरित करने की यह एक आसान व्यवस्था है।
★ ऐसी व्यवस्था भारत में आज पहली बार नहीं लायी जा रही है... Operate Maintain Transfer (OMT), Toll Operate Transfer (TOT), Operations, Maintenance & Development (OMD) ऐसी तीन पद्धतियों से भारत सरकार के सैंकड़ों प्रकल्पों का Monetization अटलबिहारी बाजपेयी एवं मनमोहन सिंग के कार्यकाल में हुआ है...!
★ पूरे देश में विशेषत: राष्ट्रीय महामार्गों पर बने टोल नाकों पर OMD और TOT पद्धति से टोल वसूली के ठेके पिछले दो दशकों से दिये जा रहे हैं.... देश के बहुत से बड़े हवाईअड्डों के रखरखाव, मरम्मत तथा व्यवस्थापन का दायित्व OMD पद्धति से कई कम्पनियों को दिया जाता रहा है..!
★ संक्षेप में कहें तो उन प्रकल्पों से सरकार को अगले २०-२५ वर्षों तक हो सकनेवाली आमदनी को इन कम्पनियों से अग्रिम ले कर उन्हें वे प्रकल्प व्यावसायिक ढंग से चलाने के लिये जाते हैं... कंपनी ने सरकार को अग्रिम दी धनराशि से अधिक कमाई वह कम्पनी कर ले तो वह उसका लाभ होगा, लेकिन नियमित रखरखाव, मरम्मत तथा व्यवस्थापन तथा सेवारत कर्मचा्रियों का वेतन आदि व्यय करने के उपरान्त पैसा न बचे तो कम्पनी को वह घाटा भी सहना पड़ेगा...!
★ तय की गयी कालावधि के पश्चात् चाहे तो सरकार स्वयं उस प्रकल्प के नियमित रखरखाव, मरम्मत तथा व्यवस्थापन का जिम्मा उठाये या फिर किसी कम्पनी को आगे की अवधि के लिये अग्रिम धनराशि ले कर अगला ठेका दे दे ।
★ इतना सब होने पर भी उन प्रकल्पों के स्वामित्व का पूरा अधिकार भारत सरकार के पास ही रहता है, शुल्क की वसूली का अधिकार किसी कम्पनी को हस्तान्तरित करने पर भी स्वामित्व सरकार के पास रहता है...!
★ सब कुछ इतना सुस्पष्ट, पारदर्शी तथा आसानी से समझने योग्य होने पर भी व्यर्थ में "बेच दिया" का हल्ला मचा कर अपने मुँह के बल गिरने का ही शौक विरोधियों ने पाल रखा हो तो कोई क्या कर सकता है..?
★ वित्तमंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने दि.२३ ऑगस्ट को नया "राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाईपलाईन प्रोजेक्ट" प्रस्तुत किया है, उसके अनुसार केन्द्र सरकार के स्वामित्व की और स्थापित क्षमता से कम मात्रा में उपयोग की जानेवाली भूमि-भवनादि स्थिर सम्पत्ति एवं संसाधन निजी उद्योजकों तथा उद्योग कम्पनियों को नीलामी की उचुत प्रक्रिया के उपरान्त दीर्घ अवधि के लिये किराये पर या लीज़ पर दिये जायेंगे,,, और हाँ, नीलामी केवल सरकार को दी जानेवाली अग्रिम धनराशि को निश्चित करने के लिये होगी, सरकारी सम्पत्ति/संसाधन के स्वामित्व की नहीं...! किराये/लीज़ की अवधि में वे निजी उद्योजक तथा कम्पनियाँ उस सम्पत्ति/संसाधन का उपयोग कर सकेंगे... उस अवधि में उस भूमि पर लगाये जानेवाले प्रकल्पों का निर्माण, नियमित रखरखाव, मरम्मत तथा व्यवस्थापन वही निजी उद्योजक करेंगे, उन प्रकल्पों को चलाने के लिये नियुक्त कर्मचारियों का वेतन, भत्ते आदि का दायित्व भी उसीउ द्योजक के कन्धों पर होगा.... ऐर उस अवधि में भी उस सम्पत्ति/संसाधन पर स्वामित्व का अधिकार सरकार का यानी देश का ही होगा... किसी को कुछ भी "बेचा" जानेवाले नहीं है...!
★ इस प्रकार किये जानेवाले सरकारी सम्पत्ति के मुद्रीकरण (Asset Monetisation) के कुछ लाभ तो स्पष्ट हैं....
१) सरकार को कम से कम ₹ ६ लाख करोड़ की धनराशि अग्रिम मिल जायेगी।
२) इन प्रकल्पों को चलाते समय होता रहा वित्तीय घाटा अब देश को उठाना नहीं पड़ेगा।
३) नेहरू-इन्दिरा पितापुत्री के द्वारा देश पर थोपे हुए समाजवाद एवं राष्ट्रीयकरण के चलते सरकारी नौकरियों के सुरक्षित पदों पर बैठ कर बिना कुछ काम किये मोटा वेतन लेनेवाले मुफ़्तखोर सरकारी कर्मचारियों की फ़ौज़ को आगे से पालना नहीं पड़ेगा...!
- स्वामी निश्चलानन्द
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(इस विषय को अधिक विस्तार से समझने के लिये आगे की लिंक पर उपलब्ध लेख सहाय्यकारी हो सकता है।
https://indianexpress.com/article/explained/explained-what-is-the-governments-plan-with-the-national-monetisation-pipleline-7468258/)